अग्रवाल समाज का प्राचीन इतिहास एवं विकास
महाराजा अग्रसेन की पावन धरा अग्रोहा, सूर्यवंशी परम्परा, १८ गोत्रों की रचना एवं सामाजिक स्वावलम्बन का ऐतिहासिक प्रामाणिक विवरण।
अग्रोहा का अमर सन्देश: "एक रुपया और एक ईंट"
विश्व के इतिहास में सामाजिक समरसता और समाजवाद का सर्वोत्कृष्ट उदाहरण महाराजा अग्रसेन का यह नियम था— जब भी कोई नया व्यक्ति अग्रोहा में बसने आता, तो नगर का प्रत्येक निवासी उसे १ रुपया एवं १ ईंट भेंट करता। १ ईंट से उसका गृह बनता तथा १-१ रुपये की निधि से उसका व्यापार स्थापित होता था।
अग्रवाल जाति का प्राचीन इतिहास
लेखक: डॉ. सत्यकेतु विद्यालंकार
१. परिचय एवं प्रामाणिकता
सुप्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. सत्यकेतु विद्यालंकार द्वारा रचित यह ग्रन्थ अग्रवाल समाज की प्राचीनता, सूर्यवंश परम्परा एवं अग्रोहा साम्राज्य का सर्वाधिक प्रामाणिक विवरण प्रस्तुत करता है। पौराणिक एवं पुरातात्विक प्रमाणों के आधार पर यह ग्रन्थ महाराजा अग्रसेन के लोक-कल्याणकारी शासन का उल्लेख करता है।
२. सूर्यवंश परम्परा एवं अहिंसा दर्शन
महाराजा अग्रसेन का जन्म प्रतापनगर के राजा वल्लभसेन के कुल में हुआ। उन्होंने यज्ञों में पशु-बलि की प्रथा पर पूर्ण विराम लगाकर सम्पूर्ण समाज को अहिंसा, व्यापार, गो-पालन एवं कृषि आधारित अर्थव्यवस्था से जोड़ा।
३. महाराजा अग्रसेन द्वारा स्थापित १८ गोत्र एवं उनके ऋषि
गर्ग
गर्ग ऋषि
गोयल
गोभिल ऋषि
कुच्छल / गौतम
गौतम ऋषि
बंसल
वत्स ऋषि
मित्तल
विश्वामित्र ऋषि
सिंघल
शाण्डिल्य ऋषि
जिंदल
जैमिनी ऋषि
तिंगल
ताण्ड्य ऋषि
तायल
त्रिपुर ऋषि
बिंदल
व्यास ऋषि
धारण
धौम्य ऋषि
नागल
नागदेव ऋषि
ऐरण
और्व ऋषि
मधुर
माण्डव्य ऋषि
भंदल
भरद्वाज ऋषि
गोयन
गौतम ऋषि
मंगल
मुद्गल ऋषि
कांसल
काश्यप ऋषि
४. अग्रोहा से देशव्यापी प्रवास
विदेशी आक्रमणों के उपरान्त अग्रोहा के विनाश के पश्चात् अग्रवाल समाज राजस्थान (जयपुर, शेखावाटी, मारवाड़), मालवा, उत्तर प्रदेश और सम्पूर्ण भारत में स्थापित हुआ तथा सत्य, ईमानदारी व व्यापारिक साख से भारत की समृद्धि में योगदान दिया।
अग्रवाल जाति का विकास
ऐतिहासिक एवं सामाजिक विकास अध्ययन
१. व्यापारिक उद्भव एवं मण्डियाँ
अग्रवाल समाज ने भारत के आर्थिक मानचित्र को रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जयपुर, जोधपुर, बीकानेर एवं शेखावाटी क्षेत्रों में व्यापारिक मण्डियों, हुंडी साख प्रणाली एवं भव्य हवेलियों की स्थापना में अग्रवाल श्रेष्ठियों का योगदान अविस्मरणीय है।
२. दान-धर्म एवं जन-कल्याण संस्थाएँ
अग्रवाल समाज की मुख्य पहचान दानशीलता रही है। भारत के हर नगर व तीर्थस्थल में अग्रवाल समाज द्वारा धर्मशालाएँ, अन्नक्षेत्र, गौशालाएँ, चिकित्सालय तथा महाराजा अग्रसेन भवनों का निर्माण कराया गया।
३. स्थानीय अग्रवाल सभाएँ एवं संगठन
अग्रवाल समाज की चेतना को संगठित करने के लिए अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन तथा स्थानीय स्तर पर मानसरोवर अग्रवाल समाज समिति जैसे संगठनों ने समाज बंधुओं को एकजुट किया।
४. आधुनिक भारत में अग्रवाल समाज
आज अग्रवाल समाज उद्योग, व्यापार, प्रशासनिक सेवाओं (IAS/IPS), चिकित्सा, इंजीनियरिंग एवं तकनीक में राष्ट्र निर्माण में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।